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धरती को ठंडा करने की अनोखी पहल:दल्लीराजहरा में फेंके गए अमलतास-गुलमोहर के सीड बॉल, बारिश में खुद उगेंगे पेड़

बालोद। बढ़ते तापमान और घटते जंगलों के बीच पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल सामने आई है। पर्यावरण प्रेमी वीरेन्द्र सिंह ने ग्रामीण...


बालोद। बढ़ते तापमान और घटते जंगलों के बीच पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल सामने आई है। पर्यावरण प्रेमी वीरेन्द्र सिंह ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मरकाटोला नर्सरी और टुल्लू बांध के आसपास अमलतास और गुलमोहर के 200 सीड बॉल फेंके हैं। जो बारिश के बाद अपने आप अंकुरित होकर पौधों में बदल जाएंगे।

इस अभियान में आसपास के गांवों के युवाओं और किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर मिट्टी, गोबर खाद और बीज से सीड बॉल तैयार किए। इन बॉल्स को खाली पड़ी जमीन, पहाड़ियों और रास्तों के किनारे फेंका गया, ताकि बारिश होते ही ये अंकुरित होकर हरियाली फैला सकें।

बालोद में 2000 सीड बॉल फेंकने की योजना

अभियान को आगे बढ़ाते हुए अगले चरण में मानसून से पहले बालोद जिले के जंगलों, नदी-नालों और बंजर जमीनों पर 2000 सीड बॉल फेंकने की योजना है। इससे न सिर्फ हरियाली बढ़ेगी बल्कि भू-क्षरण को रोकने में भी मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सीड बॉल तकनीक में पौधों की देखभाल की जरूरत कम होती है, क्योंकि ये प्रकृति के भरोसे खुद विकसित होते हैं।

नीम, आम और जामुन के बीज से बनेंगी नई हरियाली

वीरेन्द्र सिंह ने आम जनता से भी अपील की है कि वे करंज, नीम, आम और जामुन जैसे फलों के बीजों को फेंकने के बजाय सुरक्षित रखें और बारिश से पहले सीड बॉल बनाकर खाली जगहों पर फेंकें। उनका कहना है कि यदि हर व्यक्ति थोड़ा योगदान दे, तो आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ हवा और हरियाली मिल सकती है।

गौरतलब है कि सीड बॉल तकनीक जापान से शुरू हुई एक सरल और कम लागत वाली विधि है, जिसे जंगल विकसित करने का प्रभावी तरीका माना जाता है। मरकाटोला और टुल्लू बांध क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल अब पूरे जिले के लिए एक प्रेरणा बनती जा रही है।

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