नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों के बाद अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन (री-इ...
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों के बाद अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी जारी की है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर भुगतान की सुविधा के लिए चार सरकारी बैंकों के पेमेंट गेटवे उपलब्ध करा दिए गए हैं और यह व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर रही है।
बोर्ड के अनुसार, हजारों छात्र बिना किसी परेशानी के अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। सीबीएसई ने बताया कि पोर्टल पर भुगतान के लिए भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के पेमेंट गेटवे उपलब्ध हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि छात्रों का इन बैंकों में खाता होना आवश्यक नहीं है। कोई भी छात्र उपलब्ध पेमेंट गेटवे के माध्यम से आसानी से शुल्क का भुगतान कर सकता है। उम्मीदवारों को ऑनलाइन भुगतान के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।
छात्र यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से निर्धारित पेमेंट गेटवे पर भुगतान कर सकते हैं। इससे देशभर के छात्रों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिल रही है।
सीबीएसई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह 9:30 बजे तक लगभग 40,000 छात्र इस सुविधा का लाभ उठाकर सफलतापूर्वक अपना आवेदन जमा कर चुके हैं। बोर्ड ने कहा कि अब तक आवेदन प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है और किसी प्रकार की व्यापक तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है।
हाल के दिनों में पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की सूचनाएं और दावे सामने आए थे। ऐसे में सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल बोर्ड की आधिकारिक सूचनाओं और घोषणाओं पर ही भरोसा करें तथा किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी से बचें।
बोर्ड ने दोहराया है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए पोर्टल की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और सुचारू बनी रहे।
गौरतलब है कि कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने शिकायत की थी कि जब उन्होंने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं देखीं तो कई पन्ने धुंधले दिखाई दे रहे थे। कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिका के कुछ हिस्से गायब होने का आरोप लगाया, जबकि कई छात्रों को बोर्ड की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कई छात्रों का यह भी कहना था कि उन्हें जो उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई गईं, वे उनकी थीं ही नहीं। इन शिकायतों के बाद सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न छात्र संगठनों तक, ओएसएम प्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन में त्रुटियां हैं, जिससे उनके अंतिम परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।


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