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चेकडैम बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, जल संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर

रायपुर, 23 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम...


रायपुर, 23 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बनाए गए चेकडैम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।

बलरामपुर जिले के राजपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत उफिया में सुई थोपा नाला पर निर्मित चेकडैम इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। इस संरचना ने न केवल वर्षा जल का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया है, बल्कि क्षेत्र के भू-जल स्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। पहले जहां जल संकट के कारण किसान सीमित खेती तक ही सीमित थे, वहीं अब उन्हें वर्षभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है।

चेकडैम के निर्माण से लगभग 16 एकड़ कृषि भूमि सिंचित हो रही है, जिससे 7 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। किसान अब गेहूं, सरसों, मक्का, धान और सब्जियों जैसी बहुफसली खेती कर अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। इसके साथ ही आसपास के 25 से 30 अन्य किसान भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

मनरेगा के तहत किए गए इस निर्माण कार्य ने स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध कराया, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। सिंचाई सुविधा मिलने से किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और बहुफसली खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

चेकडैम के निर्माण के बाद न केवल किसानों को, बल्कि मवेशियों को भी वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। इस प्रकार जल संरक्षण आधारित यह पहल ग्रामीण विकास, कृषि समृद्धि और आजीविका सुदृढ़ीकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।

 

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