Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

ब्रेकिंग

latest
//

कांतारा' के बाद अब 'जय हनुमान' के जरिए ऋषभ शेट्टी दिखाएंगे भारतीय संस्कृति की असली ताकत

  मुंबई। एक ऐसी इंडस्ट्री में जहाँ अक्सर फिल्मों की भव्यता और दिखावे पर जोर दिया जाता है, वहाँ ऋषभ शेट्टी ने यकीन, लोककथाओं और भगवान की शक्त...

 


मुंबई। एक ऐसी इंडस्ट्री में जहाँ अक्सर फिल्मों की भव्यता और दिखावे पर जोर दिया जाता है, वहाँ ऋषभ शेट्टी ने यकीन, लोककथाओं और भगवान की शक्ति को सिनेमा के बीचों-बीच रखकर एक अलग ही रास्ता बनाया। 'कांतारा' और इसके प्रीक्वल 'कांतारा चैप्टर 1' के साथ, शेट्टी ने सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी ही नहीं दी, बल्कि उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़ी लोकल परंपराओं को पूरी दुनिया के लिए एक यादगार फिल्मी अनुभव में बदल दिया।

'कांतारा' फ्रेंचाइजी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1300 करोड़ का आंकड़ा पार किया है, किसी एक इंसान (लेखक, एक्टर और डायरेक्टर) की मेहनत से हासिल किया गया एक बड़ा मुकाम है। लेकिन कमाई से हटकर इसकी असली जीत कुछ और ही है। शेट्टी ने तटीय कर्नाटक की पवित्र परंपराओं को पर्दे पर उतारा और वहां की दैवीय कहानियों को पूरी सच्चाई और सम्मान के साथ पेश किया। 'कांतारा' में दिखाई गई आध्यात्मिक एनर्जी सिर्फ दिखावे के लिए नहीं थी, बल्कि वो कहानी की जान थी। हर भाषा के दर्शकों ने फिल्म में दिखाए गए भरोसे, समाज और उस अनदेखी ईश्वरीय शक्ति से खुद को जुड़ा हुआ महसूस किया, जो इंसान की किस्मत को चलाती है।

इस फ्रेंचाइजी को पूरी दुनिया में इसलिए पसंद किया गया क्योंकि इसने अपनी स्थानीय पहचान को कभी नहीं छोड़ा। बिना किसी मिलावट के वहां के रिवाजों, मान्यताओं और नजारों को अपनाकर ऋषभ शेट्टी ने साबित कर दिया कि किसी की नकल करने से बेहतर है कि आप अपनी सच्चाई दिखाएं। कहानी अपनी जड़ों से जितनी जुड़ी हुई थी, उसकी भावनाएं उतनी ही ज्यादा लोगों के दिलों तक पहुंचीं।

अब 'जय हनुमान' के साथ ऋषभ शेट्टी एक बार फिर पर्दे पर भगवान की महिमा दिखाने के लिए तैयार हैं। अगर 'कांतारा' ने वहां की स्थानीय आध्यात्मिक परंपराओं का जश्न मनाया था, तो 'जय हनुमान' भी उसी यकीन और सांस्कृतिक गहराई के साथ पौराणिक भव्यता को दिखाने का वादा करती है। लोगों की उत्सुकता सिर्फ फिल्म के बड़े स्केल को लेकर नहीं है, बल्कि इस बात को लेकर है कि शेट्टी एक बार फिर भक्ति, कहानी और सिनेमा की ताकत को कैसे एक साथ जोड़ेंगे।

अपनी मिट्टी से लेकर दुनिया भर की वाहवाही तक, ऋषभ शेट्टी लगातार यह दिखा रहे हैं कि आस्था से जुड़ी भारतीय कहानियों को उनकी आध्यात्मिक आत्मा को बरकरार रखते हुए कैसे पूरी दुनिया में मशहूर किया जा सकता है।


No comments

दुनिया

//