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ग्रामीण स्वच्छता का मॉडल बन रहा बालोद, ग्रे-वॉटर प्रबंधन से गांव हो रहे स्वच्छ और जल-सुरक्षित

  रायपुर: स्वच्छ एवं जल-सुरक्षित गांवों का निर्माण जल जीवन मिशन जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी पहलों क...

 


रायपुर: स्वच्छ एवं जल-सुरक्षित गांवों का निर्माण जल जीवन मिशन जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी पहलों के माध्यम से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाना, जल का संरक्षण करना और ठोस/तरल कचरे का उचित प्रबंधन कर बीमारियों से बचाव करना है। ग्रे-वॉटर (रसोई और स्नानघर का गंदा पानी) का उचित प्रबंधन गांवों को स्वच्छ और जल-सुरक्षित बना रहा है। सोख्ता गड्ढों, किचन गार्डन और विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली के माध्यम से, इस पानी को उपचारित करके पुनः उपयोग में लाया जा रहा है। यह जलभराव और बीमारियों को रोकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वच्छ एवं जल-सुरक्षित गांवों के निर्माण की दिशा में बालोद जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्रे-वॉटर (रसोई, स्नानघर एवं कपड़े धोने के बाद निकलने वाले पानी) के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। बालोद में सोकपिट, मैजिक पिट एवं अन्य ग्रे-वॉटर प्रबंधन संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को नया आयाम मिला है। इससे न केवल गांवों में जलभराव और गंदगी की समस्या का समाधान हुआ है, बल्कि भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में घरों से निकलने वाला ग्रे-वॉटर पहले सड़कों एवं गलियों में बहता था, जिससे जलभराव, दुर्गंध, गंदगी तथा मच्छरों के पनपने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती थीं। अब सोकपिट एवं मैजिक पिट जैसी संरचनाओं के माध्यम से इस पानी का सुरक्षित निस्तारण किया जा रहा है। पानी सीधे भूमि में समाहित होने से गांवों की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार आया है और ग्रामीणों को साफ-सुथरा एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो रहा है।

ग्रे-वॉटर प्रबंधन की इन संरचनाओं से वर्षा जल एवं घरेलू अपशिष्ट जल का भूमि में पुनर्भरण हो रहा है, जिससे भू-जल स्तर को बनाए रखने में सहायता मिल रही है। यह पहल जल संरक्षण के साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

खुले में गंदा पानी जमा नहीं होने से जल प्रदूषण में कमी आई है और मच्छरों के प्रजनन पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। इसके परिणामस्वरूप संक्रामक बीमारियों के प्रसार का खतरा भी कम हुआ है। कई ग्रामों में उपचारित जल का उपयोग पौधारोपण एवं हरित क्षेत्रों के संरक्षण में किया जा रहा है, जिससे जल के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।

जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि सोकपिट, मैजिक पिट एवं अन्य ग्रे-वॉटर प्रबंधन संरचनाओं का नियमित उपयोग एवं रखरखाव करें तथा इनमें किसी भी प्रकार का ठोस कचरा न डालें। जनसहभागिता से ही यह अभियान और अधिक प्रभावी बनेगा तथा स्वच्छ, स्वस्थ, पर्यावरण-अनुकूल एवं जल-सुरक्षित गांवों के निर्माण का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकेगा।

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