रायपुर, 12 जून 2026 महुआ से समृद्धि की राह का मूल उद्देश्य पारंपरिक और औषधीय गुणों वाले महुआ के वैज्ञानिक संग्रहण और मूल्यवर्धन के माध्यम से...
रायपुर, 12 जून 2026 महुआ से समृद्धि की राह का मूल उद्देश्य पारंपरिक और औषधीय गुणों वाले महुआ के वैज्ञानिक संग्रहण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण व आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है । इसे आय और रोजगार का एक स्थायी साधन बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वनोपज आधारित आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में राजनांदगांव जिले का वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) कौरिनभाठा महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। महुआ आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण से यहां की आदिवासी महिलाओं को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया अवसर मिला है।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से संचालित इस केंद्र में महिला स्व-सहायता समूहों को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिष्ठित संस्थानों सीएफटीआरआई मैसूर और सिफेट लुधियाना से प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन ने महिलाओं के कौशल को नई दिशा दी है।
महुआ और मिलेट्स (मोटे अनाज) को मिलाकर कुकीज़, ब्राउनी और पैनकेक बनाए जा रहे हैं। केंद्र से जुड़ी महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध महुआ और मोटे अनाज (मिलेट्स) का उपयोग कर महुआ लड्डू, महुआ स्क्वैश, महुआ अचार, महुआ एनर्जी बार, महुआ कुकीज़, महुआ जैम तथा मिलेट कुकीज़ जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। पौष्टिकता, गुणवत्ता और प्राकृतिक स्वाद के कारण इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इनकी बिक्री प्रदर्शनी, खुदरा विक्रय केंद्रों और ऑनलाइन माध्यमों से की जा रही है।
यह आयरन, विटामिन और कैल्शियम से भरपूर एक सुपरफूड है, इससे प्राकृतिक सिरप, मूसली और शहद जैसे उत्पाद तैयार हो रहे हैं जो मधुमेह के मरीजों के लिए भी उपयोगी हैं। इस पहल ने क्षेत्र की आदिवासी महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार और आय के अवसर सृजित किए हैं। परंपरागत वनोपज को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादों में बदलकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं और अन्य समूहों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
वन धन विकास केंद्र कौरिनभाठा ने वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक लगभग 1.26 करोड़ रुपये का कुल विक्रय किया है। इस अवधि में समूह को लगभग 3.41 लाख रुपये का लाभ और कमीशन प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि दर्शाती है कि वनोपज आधारित उद्यमिता ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
महुआ बिना पूंजी के प्राप्त होने वाला एक प्राकृतिक उपहार है, जो ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है ।वन धन विकास केंद्र कौरिनभाठा आज इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और सामूहिक उद्यमिता के माध्यम से वनोपज को समृद्धि का आधार बनाया जा सकता है। यह केंद्र महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास का सफल मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।


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