रायपुर, 27 मई 2026 छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के ...
रायपुर, 27 मई 2026 छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के परिसर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला के दूसरे दिन “धान की खेती के बदले औषधीय पौधों की खेती” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें अभनपुर विकासखंड के जनप्रतिनिधियों, धान खरीदी समिति के सदस्यों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में औषधीय पौधों की खेती के सलाहकार एवं सेवानिवृत्त वनमंडलाधिकारी डी.के.एस. चौहान ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कृषकों को ब्राह्मी, वच, सतावर, लेमनग्रास और खस जैसे उच्च मूल्य वाले औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि औषधि पादप बोर्ड द्वारा इच्छुक किसानों को औषधीय पौधों के निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं, समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है तथा सफल कृषकों के खेतों का अध्ययन भ्रमण भी कराया जाता है ताकि किसान व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकें।
समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने कहा कि पारंपरिक धान की खेती के बदले औषधीय पौधों की खेती अपनाना किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन और वैज्ञानिक विकल्प है। हमारा बोर्ड केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुबंधित संस्थाओं के माध्यम से किसानों की पूरी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की सुनिश्चित व्यवस्था भी करता है। यह देश की सबसे प्रभावी और भरोसेमंद योजनाओं में से एक है। उन्होंने उपस्थित सभी त्रिस्तरीय पंचायती राज जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के ग्रामीण किसानों को औषधीय खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करें।
कार्यशाला के सभी संभागियों और कृषकों को प्रायोगिक तौर पर रोपण हेतु भस्मपत्ती, कपूर कचरी और हठजोड़ के औषधीय पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस अवसर पर तकनीकी विशेषज्ञ डी.के.एस. चौहान, प्रगति पटेल, अभनपुर जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष खेलूराम साहू, स्वयं सहायता समूह, अशासकीय संगठन के प्रतिनिधि सहित वनांचल एवं ग्रामीण अंचलों से आए बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषक और प्रतिनिधि उपस्थित थे।


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