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भीषण धमाके के साथ राखड़ बांध फटा, ऑपरेटर की दर्दनाक मौत, मशीनों के उड़े परखच्चे

कोरबा। कोरबा में एक बार फिर औद्योगिक लापरवाही ने एक निर्दोष की जान ले ली। रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी (एचटीपीएस) का लोतलोत...



कोरबा। कोरबा में एक बार फिर औद्योगिक लापरवाही ने एक निर्दोष की जान ले ली। रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी (एचटीपीएस) का लोतलोता स्थित राखड़ बांध भीषण धमाके के साथ फूट गया। इस हादसे में हजारों टन जहरीली राख का सैलाब रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर बह निकला, जिसकी चपेट में आने से एक जेसीबी ऑपरेटर की दर्दनाक मौत हो गई।

हादसा रविवार दोपहर लगभग 12 बजे का है। दर्री स्थित 1340 मेगावाट क्षमता वाली एचटीपीएस इकाई का राखड़ पाइपलाइन के जरिए कोसों दूर लोतलोता गांव के बांध में डंप किया जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बांध के रख-रखाव (स्टेंडिंग) का काम चल रहा था, तभी अचानक तटबंध के एक हिस्से पर भारी दबाव बना। देखते ही देखते करीब 30 मीटर का हिस्सा तेज धमाके के साथ फट गया। बांध से लगभग 150 फीट की ऊंचाई से राख और पानी का मिश्रण (स्लरी) सुनामी की तरह नीचे गिरा।

इस सैलाब की रफ्तार इतनी तेज थी कि वहां काम कर रही एक जेसीबी और एक पोकलेन मशीन खिलौनों की तरह बह गई। जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप (21), निवासी ग्राम संडैल (उरगा), मलबे के साथ कई बार पलटा और गहरे कीचड़ में दब गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, पोकलेन ऑपरेटर ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह मलबे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

गांवों में खड़ा हुआ पेयजल संकट

तटबंध फटने से हजारों टन राखड़ सीधे हसदेव नदी के जलप्रवाह में मिल गया है। इससे न केवल जलीय जीवन को खतरा पैदा हो गया है, बल्कि नदी के किनारे बसे गांवों के लिए पेयजल का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

मुआवजे पर 5 घंटे चला हंगामा

घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों का घेराव कर दिया और शव को उठाने से रोक दिया। उनकी मांग थी कि मृतक के परिवार को 30 लाख रुपए मुआवजा और स्थायी रोजगार दिया जाए। करीब 5 घंटे तक चले तनावपूर्ण माहौल और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद समझौता हुआ। प्रबंधन ने 5 लाख रुपए की तत्काल सहायता, 18 लाख रुपए कानूनी प्रक्रिया के बाद देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


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