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भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज़ी, 2026 में डेटा सेंटर क्षमता 30% बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली। भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2026 में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह मजबूत मांग और इस सेक्टर में निवेशकों की...

नई दिल्ली। भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2026 में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह मजबूत मांग और इस सेक्टर में निवेशकों की रुचि बने रहना है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट के नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़े जाने का अनुमान है, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट की क्षमता से अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट थी।इस सेक्टर ने नई पूंजी भी आकर्षित की है और 2025 में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएं 126 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं। इन प्रतिबद्धताओं में इस वर्ष लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।

सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने आगे कहा कि विकास को गति देने में विदेशी पूंजी की प्रमुख भूमिका बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य निवेश में अग्रणी भूमिका निभाएंगे, हालांकि कम लेटेंसी, 5जी रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण अहमदाबाद, विशाखापट्टनम, पटना और भोपाल सहित टियर-II शहरों में भी गतिविधि तेजी से फैल रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मुंबई सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है – भारत के कुल चालू डेटा सेंटरों में से 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित हैं। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान करते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग के कारण बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। सीबीआरई के अनुसार, कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण सहित सहायक सरकारी नीतियों से निवेश में और तेजी आने और भारत के एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है।


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