Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

ब्रेकिंग

latest
//

बस्तर के वनांचलों में डिजिटल क्रांति

  रायपुर, 18 मार्च 2026 वह मंजर आज भी बस्तर के वनांचलों की यादों में एक कसक पैदा कर देता है, जब एक लाचार बुजुर्ग को अपनी चंद रूपए की पेंशन क...

 


रायपुर, 18 मार्च 2026 वह मंजर आज भी बस्तर के वनांचलों की यादों में एक कसक पैदा कर देता है, जब एक लाचार बुजुर्ग को अपनी चंद रूपए की पेंशन के लिए तपती धूप में मीलों पैदल चलना पड़ता था। कभी शारीरिक अक्षमता तो कभी तंगहाली के कारण बैंक तक न पहुँच पाने का वह दर्द और थक-हारकर सूनी आँखों से लौट आने की वह बेबसी ग्रामीण जीवन का एक कड़वा सच थी। लेकिन वक्त बदला और बस्तर की इन पथरीली राहों पर ममता और सेवा का हाथ बढ़ाते हुए बीसी सखियों ने उस करुणा को शक्ति में बदल दिया है। आज वही बुजुर्ग अपनी देहरी पर बैठी बैंक सखी को देख मुस्करा उठता है, क्योंकि अब बैंक चलकर उसके घर तक आता है।

ग्रामीण बैंकिंग के इस मानवीय चेहरे का सबसे जीवंत उदाहरण छिदगांव में देखने को मिलता है, जहाँ के वृद्ध हितग्राही रतन राम बघेल वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। ऐसे में बीसी सखी दशोमती कश्यप हर माह उनके घर जाकर पेंशन की राशि उनके हाथों में सौंपती हैं। अपनी इस सुविधा पर खुशी जाहिर करते हुए रतन राम बघेल कहते हैं कि बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण मेरे लिए बैंक तक जाना अब संभव नहीं रह गया था, पेंशन के पैसों के लिए हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब दशोमती बेटी हर महीने घर आकर पैसे दे जाती है, जिससे मुझे बहुत सहारा मिला है। 

बैंक और ग्रामीणों के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर उभरीं जिले की इन 144 बीसी सखियों ने फरवरी महीने में 4 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन कर यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को अवसर और तकनीक मिले, तो वे पूरी अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती हैं। इन बैंक सखियों ने न केवल बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाया है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई है। विशेष रूप से मातृत्व वंदना योजना के तहत 67 लाख रुपये से अधिक की राशि गर्भवती और धात्री माताओं तक पहुँचाकर इन सखियों ने स्वास्थ्य और पोषण की दिशा में भी बड़ा योगदान दिया है। इसके साथ ही बुजुर्गों की पेंशन और नरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान भी अब इन्हीं बैंक सखियों के माध्यम से गाँव में ही सुरक्षित तरीके से हो रहा है।

महिला सशक्तिकरण का सबसे सुंदर उदाहरण दरभा और बस्तर जैसे ब्लॉकों में देखने को मिला, जहाँ इन बैंक सखियों ने दिन-रात मेहनत कर हजारों ट्रांजैक्शन किए। लोहंडीगुड़ा और तोकापाल जैसे क्षेत्रों में भी सखियों ने बड़ी कुशलता के साथ लाखों रुपयों का प्रबंधन किया। यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि उन 144 महिला शक्तियों के आत्मविश्वास की कहानी है जो अब खुद आत्मनिर्भर हैं और अपने गाँव के विकास का नेतृत्व कर रही हैं। बस्तर की इन बेटियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया का असली चेहरा गाँवों की ये सशक्त बीसी सखियाँ ही हैं।






No comments

दुनिया

//