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PRAGATI: जानें तकनीक, जवाबदेही और समन्वय से कैसे बदला भारत का परियोजना शासन मॉडल

  नई दिल्ली। भारत में दशकों तक बड़ी सार्वजनिक परियोजनाएं देरी, लागत बढ़ने और प्रशासनिक अड़चनों की पर्याय बनी रहीं। रेल लाइनें हों, राष्ट्रीय...

 


नई दिल्ली। भारत में दशकों तक बड़ी सार्वजनिक परियोजनाएं देरी, लागत बढ़ने और प्रशासनिक अड़चनों की पर्याय बनी रहीं। रेल लाइनें हों, राष्ट्रीय राजमार्ग, बिजली संयंत्र या हवाई अड्डे-अधिकांश परियोजनाएं तय समय-सीमा से वर्षों, कभी-कभी दशकों तक पीछे खिसकती रहीं। इसकी प्रमुख वजह केंद्र और राज्यों के बीच, विभिन्न मंत्रालयों के बीच तथा राज्य स्तर पर विभागों के बीच समन्वय की कमी रही।

सार्वजनिक परियोजनाओं में समय और लागत बढ़ने की समस्या किसी एक कारण से नहीं, बल्कि प्रणालीगत खामियों का नतीजा थी। इनमें केंद्रीय मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी, केंद्र-राज्य-स्थानीय सरकारों के बीच तालमेल का अभाव और राज्यों के भीतर विभागीय प्रमुख रहे। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PRAGATI को एक व्यापक, तकनीक-आधारित शासन तंत्र के रूप में परिकल्पित किया।

25 मार्च 2015 को PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) के शुभारंभ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शासन को अधिक कुशल और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था, खासकर ऐसे समय में जब पूरी दुनिया भारत की विकास यात्रा पर नजर बनाए हुए थी।

PRAGATI का मूल उद्देश्य केंद्र–केंद्र और केंद्र–राज्य समन्वय को मजबूत करना रहा है। इसके तीन प्रमुख लक्ष्य तय किए गए- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को दूर कर उन्हें तेजी से आगे बढ़ाना, कमजोर प्रदर्शन कर रही प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के नतीजों में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी नागरिक शिकायतों का समाधान। पारंपरिक समीक्षा प्रणालियों से अलग, PRAGATI एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर परियोजना निगरानी, शिकायत निवारण और योजना कार्यान्वयन को एकीकृत करता है। इसमें PM GatiShakti, PARIVESH और PM Reference Portal जैसे अहम शासन उपकरण भी शामिल हैं, जिससे रियल-टाइम में प्रगति की निगरानी और समस्याओं का समाधान संभव हो पाता है।

इस व्यवस्था की सबसे अहम विशेषता यह है कि PRAGATI समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं, जिनमें राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्र सरकार के सचिव सीधे तौर पर शामिल होते हैं। सामान्य मुद्दों का समाधान मंत्रालय स्तर पर किया जाता है, जबकि जटिल और अहम मामलों को चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत PRAGATI तक पहुंचाया जाता है।

PRAGATI को पूर्ववर्ती निगरानी तंत्रों से अलग बनाता है इसका सख्त फॉलो-अप और एस्केलेशन मैकेनिज्म। समीक्षा के बाद लिए गए फैसलों की निगरानी कैबिनेट सचिवालय करता है, जबकि योजनाओं और शिकायतों पर मंत्रालय स्तर पर लगातार नजर रखी जाती है, जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी रहती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि फैसले कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर उतरें।

आंकड़े इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं। PRAGATI और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (PMG) पोर्टल के अनुसार, अब तक 3,300 से अधिक परियोजनाओं की निगरानी की गई है, जिनकी कुल लागत 85 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। इसके साथ ही 36 क्षेत्रों से जुड़ी 61 प्रमुख सरकारी योजनाओं और शिकायतों की भी समीक्षा की गई। कुल 7,735 मुद्दों में से 7,156 का समाधान किया जा चुका है, यानी समाधान दर 90% से अधिक रही है- जो औसतन हर कार्य दिवस में लगभग एक मुद्दे के समाधान को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समीक्षा की गई परियोजनाओं में 382 परियोजनाएं शामिल रहीं, जिनमें 637 पैकेज या खंड थे। इनमें उठाए गए 3,187 मुद्दों में से 2,958 का समाधान किया जा चुका है। सड़कों और राजमार्गों, रेलवे, बिजली तथा पेट्रोलियम क्षेत्रों की परियोजनाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है- ये वे क्षेत्र हैं, जो ऐतिहासिक रूप से भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और राइट ऑफ वे जैसी समस्याओं से जूझते रहे हैं। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण और वन अथवा पर्यावरण मंजूरी से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक सुलझाए गए, इसके बाद निर्माण स्वीकृति, यूटिलिटी अनुमतियां, वित्तीय अड़चनें और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले रहे।

PRAGATI का प्रभाव उन परियोजनाओं में सबसे स्पष्ट दिखता है, जो वर्षों से अटकी हुई थीं। जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना, जिसे 1994 में मंजूरी मिली थी, 2015 से 2020 के बीच PRAGATI समीक्षाओं के जरिए कई अड़चनों से मुक्त हुई। 272 किलोमीटर लंबी इस परियोजना-जिसमें 38 सुरंगें और 943 पुल शामिल हैं, तथा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज भी मौजूद है-को जून 2025 में चालू किया गया। इसी तरह, 2007 में स्वीकृत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लंबे समय तक ठप पड़ा रहा। PRAGATI की निगरानी के बाद परियोजना ने रफ्तार पकड़ी और दिसंबर 2025 में इसे कमीशन किया गया। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल, जिसे 1997 में मंजूरी मिली थी, PRAGATI हस्तक्षेप के बाद दिसंबर 2018 में पूरा हो सका।

PRAGATI के शासन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सईद बिजनेस स्कूल द्वारा दिसंबर 2024 में प्रकाशित एक बाहरी अध्ययन में PRAGATI को एक परिवर्तनकारी डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म बताया गया। अध्ययन में कहा गया कि इसने वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही को मजबूत किया है और लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा व सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं को गति दी है। अध्ययन ने PRAGATI को रियल-टाइम परियोजना निगरानी के लिए “सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ” बताते हुए इसे सहकारी संघवाद को मजबूत करने वाला और विकासशील देशों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल करार दिया।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, PRAGATI–PMG इकोसिस्टम के तहत 427 परियोजनाएं ली गईं, जिनमें से 158 पूरी हो चुकी हैं, 266 पर काम जारी है और तीन परियोजनाएं समाप्त की गई हैं। इन परियोजनाओं से जुड़े 1,568 मुद्दों में से 1,437 का समाधान PRAGATI के जरिए किया गया। सरकार का कहना है कि परियोजना क्रियान्वयन के अलावा PRAGATI ने पूंजीगत व्यय में वृद्धि, अंतर-सरकारी समन्वय में सुधार और शासन व्यवस्था में जनता का भरोसा बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।

50 उच्च-स्तरीय समीक्षाओं के साथ PRAGATI अब एक नवाचार से आगे बढ़कर शासन की एक स्थायी संस्था बन चुकी है- जो प्रशासनिक प्रक्रिया में जवाबदेही, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय को संस्थागत रूप देती है। जैसे-जैसे भारत बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं में निवेश बढ़ा रहा है, PRAGATI यह सुनिश्चित करने का एक मजबूत आधार बनकर उभरा है कि बड़े लक्ष्य प्रभावी क्रियान्वयन के साथ पूरे हों।

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